तपस्या और तपस्वी 

तपस्या और तपस्वी
जीवन होता यशस्वी
ध्यान साधना भक्ति
दृढ़ इच्छा परम शक्ति।

तप में ताप ऊर्जा उष्मा
तादात्म् आत्मा परमात्मा
देह से दैविक चैतन्य सफ़र
बड़ी कठिन जीवन डगर।

भोग से ऊपर होता योग
बिरलों को मिलता संयोग
स्थूल से सूक्ष्म की यात्रा
घटती भौतिक सुख मात्रा।

निर्मल शुद्ध सत्य प्रेम ताल
ओम् नाद संपुट जीवन काल
त्याग भोग से परे पूर्ण जीवन
आत्मज्ञान परिपूर्ण हर क्षण।

सत्यम शिवम और सुन्दरम
देव संस्कृति का अद्भुत संगम
निर्गुण हो या सगुण उपासक
सत्धर्म सर्वधर्म के संस्थापक।

तपस्वी और तपस्या से मिलकर
मुक्त होता "मैं" का अन्तर्भाव
ओम् ओंकार से सदा जुड़कर
शेष होते राग द्वेष बैर के घाव।

शांत चित्त परम चिर आनंद
तपस्वी बुद्ध का प्रतिरूप
घोर तपस्या से बदल जाता
समाज राष्ट्र धरती का स्वरुप।

1 Comment

  1. आशीष कुमार प्यासी
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