आज नहीं थमेगा मेरा मन दिखेगा अस्तित्व का दर्पण कलम लिखेगी अल्फाज़ मचलेंगे  होगा जज़्बातो का अर्पण। कौन हूँ कहाँ से आई हूँ क्या जीवन का उद्देश्य क्या मुझे करना है अंतर्मन को कुछ कहना है।  मैं मधु निज़ अस्तित्व को ढूँढती माँ धरती को कर प्रणाम रोज सुबह होताContinue Reading