हाथों में लगती मेहंदी बालों में सजता गज़रा माथे पर सोहती बिंदी खन खन करता कंगना। उफ्फ ये सोलह श्रृंगार औरत की खुबसूरती अपार दिल में होता खूब प्यार हरियाली तीज़ का त्यौहार। तीज़ के पूर्व होता सिंजा़रा यह दिन होता बड़ा प्यारा रिश्तों में घुलती मिठास महकता घर आँगणContinue Reading

जल ही जीवन है। जी हाँ! इसमें कहीं दो राय नहीं है। हमारा शरीर हो या पृथ्वी, दोनों में ही भरपूर जल है और इसी से यह पृथ्वी भी चल रही है और हम भी, लेकिन उसके लिए निरंतर शुद्ध जल की आवश्यकता है। दूषित जल न शरीर को मंजूरContinue Reading