राखों के ढेर से अब भी काले धुएँ निकल रहे हैं जमीं में दफन ख़ामोशी बन दिल में धधक रहे हैं मासूम बेटी को मारकर नाले में जा गिरा दिया धिक्कार दरिंदों का दुष्कर्म  आँचल तार-तार किया। खामोश गहरी आंखे टूटते बिखरते वृद्ध  माता पिता दिल में अथाह पीड़ा जीवनContinue Reading

नारी समाज का आभूषण, नारी देश की शान, घर को देकर बहुमूल्य सेवा, बढ़ाती अपनों का सम्मान। नारी बिना पुरुष अधूरा, पुरुष बिना अधूरी नारी, दोनों सम्पूर्ण एक दूजे संग, हमसफर बन गुजारे जिंदगी सारी। नारी के मातृत्व रूप पर, ईश्वर भी बलिहारी जावे, माँ बनकर जीवन देवे, सृष्टि मेंContinue Reading