सर्दियों की शादियां बड़े अनोखे मजे शाल दुशाला सूट पहन खड़े सब सजे। पॉकेट में भर लेते किशमिश काजू बादाम अग्नि समक्ष बैठ कर मिले सबको आराम। गरम-गरम समोसे कचोड़ियां पूरी हलवे ठूंस-ठूंस भर पेट सब खाते मिठाई मेवे। बेशुमार आनंद उमंग नाच जलवे मस्ती रज़ाईयों में घुस कर सबकीContinue Reading

कवि की काव्य कृति छंद लय बद्ध रीति  साहित्य की अविरल रस गंगा अद्भुत मीठी  मनोभावों की मोहिनी कलात्मक अभिव्यक्ति  हृदय तलब सुखद सुमधुर प्राचीन संस्कृति। कभी काव्य में कोमल सरस भाव बताता  कभी व्यंग्य से तीखे शब्द भरे बाण चलाता ओजस्वी काव्य से राष्ट्र नव चेतना जगाता  श्रृंगार हास्यContinue Reading