हाय रे ये ठिठुरती ठंड!!!! पौष माह ये सर्द ठिठुरती रात निर्धन को प्रकृति की कठोर सौगात थर थर कांपते उसके अंग प्रत्यंग सोते जागते करवट लेकर रात निकाले गुदड़ी के संग। हर सुबह सोने की किरणों का इंतजार कभी-कभी हो जाता बेबस और लाचार जब ओले वृष्टि से तापमानContinue Reading