पुरुषत्व ही शिव स्वरुप शिव ही सृष्टि आधार है।  बाह्य सख्त रूखा कठोर भीतर कोमल संसार है।  सावन में करते हम पूजा शिव महिमा अपरम्पार है। शक्ति से मिलती प्रेरणा भुजा बलशाली अपार है।  तेजस्वी तेज सा व्यक्तित्व उष्म प्रकाश का भंडार है।  अर्द्धनारीश्वर का सम्मान ब्रह्मा का सृजन साकारContinue Reading

बोली की मिठास से होती हमारी पहचान संतों ने बताया हमको बनता जीवन महान। हर सीख जो थी उनकी भूल गया देखो इंसान कड़वाहट से नष्ट किया भूत भविष्य और वर्तमान। बोली की तीखी मार तलवार से पैनी धार हृदय चीर करती घाव मन भरते दुख के भाव। कांव कांवContinue Reading