नारी समाज का आभूषण, नारी देश की शान, घर को देकर बहुमूल्य सेवा, बढ़ाती अपनों का सम्मान। नारी बिना पुरुष अधूरा, पुरुष बिना अधूरी नारी, दोनों सम्पूर्ण एक दूजे संग, हमसफर बन गुजारे जिंदगी सारी। नारी के मातृत्व रूप पर, ईश्वर भी बलिहारी जावे, माँ बनकर जीवन देवे, सृष्टि मेंContinue Reading

अब और नहीं रोना है,और अत्याचार नहीं सहना है, बस बहुत हुआ… अपना न्याय स्वयं करो।माँ दुर्गा ने अपनी अंतरिम शक्ति से महिषासुर का संहार किया, माँ काली का स्वरूप हो तुम। शक्तिशाली हो तुम, तभी तो तुम्हारी कोख से संतान पैदा होती है, सृष्टि का सृजन करती हो। क्यूँContinue Reading