साहित्य समाज का दर्पण जीवन की है आलोचना सत्य शिव सुंदर से तर्पण लोक मंगल की कामना साहित्य हम सबकी प्रेरणा संस्कृति हमारी है पहचान अपनी लेखनी को सहेजना राष्ट्र की है आन बान शान समाज का कर मार्गदर्शन साहित्यकार जलाते मशाल चिराग़ आलोकित प्रदर्शन प्रतिबिंबित करते विशाल काग़ज परContinue Reading

ख़ुशी की झलक कभी अश्कों की छलक प्रेम की ललक कभी अपनेपन की चहक कलम से निकले हर नायाब भावों के रंग ज्ञान के दीप प्रज्वलित नयी चेतना के संग एक ख़्वाब तलवार से पैनी क़लम की धार लेखनी मृत्यु के बाद भी जीवंत करें संसार कलम में सदा रहे Continue Reading