जो ख़ुद ही ज़हर पी जाते हैं  दूसरों पर अमृत छलकाते हैं  वही नीलकंठ महादेव कहलाते हैं।  आसां नहीं ज़हर ख़ुद के लिए रखना फूलों को छोड़ कर कांटों पर चलना कड़वाहट के घूंट गले से यूँ निगलना। ऐसा सिर्फ वो इंसां कर सकता है जो अपना कलेजा बड़ा रखताContinue Reading

सात फेरे अग्नि समक्ष सात वचन इक दूजे संग रस्म जोड़ी गठबंधन सुंदर स्वरुप मन मोहक चितवन संगिनी के संग प्रेम प्रतीक जीवन सुख दुख त्रिवेणी संगम साथ हर पहर संगी साथी बन कटता आसान सफ़र पतझड़ मौसम का हर अलबेला राग संगिनी की खुशियाँ खुशबू सा अनुराग शिव अर्द्धनारीश्वरContinue Reading