चुन चुन के लाए हम सितारें हाथ लगाया अंगारा लगता है भीड़ बढ़ती बना काफ़िला क्यूँ कोई नहीं समझता है खोद कर थक गया फावड़ा पाताल भी सूखा मिलता है जल कर सूराख बना बड़ा सूरज गगन में दहकता है अंतिम रात गहन अमावस चाँद खिलने को तड़पता है थकContinue Reading

ख़ुद को तराश लीजिये जिदंगी बेहतर महसूस होने लगेगी बिखरे मोती को जोड़ लीजिये खूबसूरत माला सजने लगेगी विसर्जन करो मन विकारों का नव चेतना में जाग्रति आएगी चिराग़ जला कर रख लीजिये स्याह रात धुंधली हो जाएगी। दूसरों की छोड़िए ज़नाब स्वयं को जीने का आनंद आएगा अहंकार सेContinue Reading

कतई ऐसा न करें विवाह का खुबसूरत समारोह, दो दिलों का एकाकीकरण, दो परिवारों का मिलन, पिता के जीवन भर की जमा पूंजी से सजाई गई खुशियों की महफिल किसके लिए? अपने रिश्तेदार, मित्र और अपने पहचान वालों के लिए, जिसमें सभी लोग शामिल होकर आनंद से झूमे, नाचे,गाये, खायेContinue Reading