तुमसे ये किसने कहा… भटक गई हूँ ख़्वाबों के पीछे भाग रही हूँ अंधाधुंध आँखें मींचे दौलत कमाने के होड़ में लगी नाते रिश्ते तोड़ के आगे बढ़ी। तुमसे ये किसने कहा… मेरी दीवानगी हुई हद पार बेपरवाह मोहब्बत में हार ए शर्मो हया को छोड़ कर ख़ुद को हीContinue Reading

ये दिल ही तो है ज़नाब…. आसमाँ में दूर तलक़ उड़ना चाहता है पंख फैला कर आकाश छूना चाहता है चाँद तारों की सैर करना चाहता है समुद्री तट पर घंटों लेटे रहना चाहता है पुष्प की भीनी-भीनी खुशबू पाना चाहता है हवा के झोंकों में आवारगी करना चाहता हैContinue Reading