साहित्य समाज का दर्पण जीवन की है आलोचना सत्य शिव सुंदर से तर्पण लोक मंगल की कामना साहित्य हम सबकी प्रेरणा संस्कृति हमारी है पहचान अपनी लेखनी को सहेजना राष्ट्र की है आन बान शान समाज का कर मार्गदर्शन साहित्यकार जलाते मशाल चिराग़ आलोकित प्रदर्शन प्रतिबिंबित करते विशाल काग़ज परContinue Reading

प्रतिध्वनि की गूँज ने हिंदी साहित्य का फैलाया परचम हम प्रतिभागियों को मंच देकर बजाया काव्य सरगम नित नए विषयों पर लाया आपने ढेर सारी प्रतियोगिता देशवासियों के मध्य बढ़ाया हिन्दी भाषा की उपयोगिता सभी के अंतर्मन में खिलाया कल्पना के सुन्दर फूल हिंदी के प्रति अनुराग बढ़ा कर हटाContinue Reading