रात की तन्हाई बना देती है  मुझे आवारा नापता हूँ मैं शहर की हर गली हर चौबारा रोशनी में  नहाई सड़कें भी  लगे बुझी सी ठोकरें खाता फिरूँ दर-ब-दर मारा-मारा। गुम हूँ आवारगी  में मेरा कोई ठिकाना नहीं बेवफ़ाई  में खाई चोट किसी  ने जाना नहीं कुछ अफ़वाह बेवजह बदनामContinue Reading

किरणों ने अब दस्तक दे दी है चलो सूरज से दोस्ती कर लें कुछ दिल की बात करनी है थोड़ी सी संग गुफ़्तगू कर लें  स्वागत गीत गाते हो पवन की अठखेलियों से हर सुमन महकाते हो तुम अपनी लालिमा से लपक झपक दुपहरी में कभी जवानी की ताप होContinue Reading