अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

डॉक्टर, नर्स, सुरक्षाकर्मी, सफ़ाईकर्मी, राजनेताओं के बाद अब है हमारी बारी… स्वदेशी अपनाओ, अर्थव्यवस्था बचाओ। एक संकल्पित विचारधारा जो सिर्फ़ एक भारतीय के पास है। जय हिन्द – जय भारत🇮🇳