सावन में भीगे हम भी सावन में भीगे तुम भी आग लगी सीना दहका आँचल भीगा सा मन का। मोहक बौछारें बरसे मादक हो त्यौं-त्यौं हरषे पायल के गूँजें घुँघरा प्रीतम को छू के बिखरा। पागल बूंदे नाच रही कोमल गंगा धार बही अंचल से गीला झरना चुंबन से अंकोंContinue Reading

पुरुषत्व ही शिव स्वरुप शिव ही सृष्टि आधार है।  बाह्य सख्त रूखा कठोर भीतर कोमल संसार है।  सावन में करते हम पूजा शिव महिमा अपरम्पार है। शक्ति से मिलती प्रेरणा भुजा बलशाली अपार है।  तेजस्वी तेज सा व्यक्तित्व उष्म प्रकाश का भंडार है।  अर्द्धनारीश्वर का सम्मान ब्रह्मा का सृजन साकारContinue Reading