तुमसे ये किसने कहा… भटक गई हूँ ख़्वाबों के पीछे भाग रही हूँ अंधाधुंध आँखें मींचे दौलत कमाने के होड़ में लगी नाते रिश्ते तोड़ के आगे बढ़ी। तुमसे ये किसने कहा… मेरी दीवानगी हुई हद पार बेपरवाह मोहब्बत में हार ए शर्मो हया को छोड़ कर ख़ुद को हीContinue Reading

मैं उससे प्यार करती थी वो मुझसे प्यार करता था कहने को तो इकरार था वही मेरा संसार था माँ बाप ने मेरा रिश्ता किसी और से तय कर दिया बहती नदी की धार का मानो रुख ही बदल दिया अनकही कई बातें रह गई आहिस्ता-आहिस्ता जिंदगी ही बदल गईContinue Reading

फ़ितरत थी साँप की चंदन से लिपटते रहे  तन की गर्मी को ठंडक देते रहे। महफ़िल में ओढ़ मुखौटा नफ़रत करते रहे दोस्ती का नाम देकर दुश्मनी करते रहे। रिश्तों की दुकान पर ख़ुद ही बिकते रहे जब-जब करीब गए फन से डसते गए। इंसानों की बस्ती में जानवरों सेContinue Reading

वो अधूरी शाम, कई अनकही बातें, खामोश लम्हें,तेरा पहला दीदार, इज़हार ए ख्वाब अभी काफ़ी है, तुम्हारा इंतज़ार अभी बाकी है।  एक लम्बी सी काली कार से, उतरते दो लम्बे पाँव, गुलाबी जैकेट से खिला तुम्हारा तन, भीड़ को देख कर, मुस्कुराती तुम्हारी निगाहें, स्वच्छ भारत के लिये, आह्वान करतीContinue Reading