खंड खंड काल खंड में भारत की सीमाओं ने गहरी चोट खाई है विभाजित बीज़ सृजित कर पुरातन संस्कृति को दफनायी है आज़ादी के बरसों बाद भी वंदेमातरम् विरोधी ध्वनि सुनाई है तुष्टीकरण की राजनीति से नेताओं ने की बड़ी रुसवाई है भूत भूलकर अब भविष्य काल में जनता नेContinue Reading

                                                                          हर आँख ग़मगीन है,  हर होंठ पर धुनी रमायी है,  हर गली हो रही वीरान,  सुषमा जी की हुई विदाई है।  जन्म-मरण काल चक्र के दो चरण,  निरंतर चलता जाएगा,  आज तेरी बारी कल मेरी बारी,  जो आया है सो जाएगा।  फूल बन कर जो जिया, वो मसला जाएगा, Continue Reading

बचपन से हमने पढ़ा और सुना है कि गाय हमारी माता है, पर क्या हम सचमुच में मानते हैं? कई समय से ईश्वरीय कृपा से गौ सेवा का सुअवसर मिला है तो मानो यूँ लगता है कि इससे पहले जीवन व्यर्थ ही व्यतीत हुआ है। किसी विशेष परिणाम के लिए निरंतरताContinue Reading