इक उम्र लगती है जीवन को समझने में रिश्तों को पिरोने में अनुभव को बटोरने में इक उम्र लगती है किनारों को ढूंढने में साहिल से तैरने में हवाओं को रोकने में इक उम्र लगती है शहर को बसने में गाँव को भूलने में बेगानों संग जीने में इक उम्रContinue Reading

बोली की मिठास से होती हमारी पहचान संतों ने बताया हमको बनता जीवन महान। हर सीख जो थी उनकी भूल गया देखो इंसान कड़वाहट से नष्ट किया भूत भविष्य और वर्तमान। बोली की तीखी मार तलवार से पैनी धार हृदय चीर करती घाव मन भरते दुख के भाव। कांव कांवContinue Reading

वो अधूरी शाम, कई अनकही बातें, खामोश लम्हें,तेरा पहला दीदार, इज़हार ए ख्वाब अभी काफ़ी है, तुम्हारा इंतज़ार अभी बाकी है।  एक लम्बी सी काली कार से, उतरते दो लम्बे पाँव, गुलाबी जैकेट से खिला तुम्हारा तन, भीड़ को देख कर, मुस्कुराती तुम्हारी निगाहें, स्वच्छ भारत के लिये, आह्वान करतीContinue Reading