जो ख़ुद ही ज़हर पी जाते हैं  दूसरों पर अमृत छलकाते हैं  वही नीलकंठ महादेव कहलाते हैं।  आसां नहीं ज़हर ख़ुद के लिए रखना फूलों को छोड़ कर कांटों पर चलना कड़वाहट के घूंट गले से यूँ निगलना। ऐसा सिर्फ वो इंसां कर सकता है जो अपना कलेजा बड़ा रखताContinue Reading

कभी जहर खाकर तो कभी फंदा लगाकर कभी ऊंचाई से गिरकर तो कभी खुद को जलाकर क्यों करते हो आत्महत्या! मरने का इतना साहस है तुममें तो जिंदा रहने की कोशिश कर जाते नई ताक़त नई शक्ति लगाकर जीने की मिशाल बन दिखाते। कमज़ोर तन के मजबूत इरादे देख जीवनContinue Reading