चाँद पर हो अपना घर सपना सलोना बड़ा सुंदर श्वेत चाँदनी जन्नत सी शीतल पुरवाई पहर-पहर चाँद चमकीला उजास में मन का सितार आस में घूंट मधु का निशी मनभावन नैनों से नैनों की रास में कुछ लम्हें यहाँ कायनात के बहुरे मोती गिरे बरसात के स्निग्ध छटा जादूगरनी सीContinue Reading

ठिठुर ठिठुर कर रात जागती                भोर की आहट होने तक  बोझ गुलामी का कंधों पर               तुम ढ़ोते रहोगे कब तक।