गिर कर थपेड़े वक़्त के खाती रही हूँ मैं फिर से चलने का साहस बढ़ाती रही हूँ मैं मंज़िल की ओर निरंतर जाती रही हूँ मैं हर पल हर दिन नई ऊर्जा लाती रही हूँ मैं। आत्मबल से पूरित हो जाए मेरा पूरा जीवन उत्साह उमंग आनंदित उल्लासपूर्ण हो मेराContinue Reading

बसंत ऋतुओं का राजा, कहलाता ऋतुराज,  फ़िजा में फूलों की खुशबू,मादकता का अंदाज। कल-कल करती नदियाँ,प्रकृति की अद्भुत छटा, चाँद की चाँदनी ठंडी हवाएँ, रखती मन तरोताजा। नई स्फूर्ति, नया मंजर, नया सबका उल्लास, तितली भँवर कर गुंजन, नई खुशियों का आभास।  पीली हल्दी, पीले हाथ, पीले पहनते परिधान, विवाहContinue Reading