गांव की माटी में सौंधी खुशबू महकती हर साँसों में खेतों में मधुर राग की झनकार बैलों के घुँघरूओं में हल चलाकर आनंद बिखरता उमंग उठती फसलों में लहलहाते वृक्ष झूमती शाखाएँ पुरवाई के झोंकों में कोपलों से खिलता परिवेश गांव का घरौंदे चिड़ियाओं के कोटरों में निश्चल स्वभाव सच्चेContinue Reading

फ़ितरत थी साँप की चंदन से लिपटते रहे  तन की गर्मी को ठंडक देते रहे। महफ़िल में ओढ़ मुखौटा नफ़रत करते रहे दोस्ती का नाम देकर दुश्मनी करते रहे। रिश्तों की दुकान पर ख़ुद ही बिकते रहे जब-जब करीब गए फन से डसते गए। इंसानों की बस्ती में जानवरों सेContinue Reading