अपने हिस्से की भूख दबाकर माँ बच्चे को रोटी खिला देती है रोटी में अमृत की बूंदे समा कर प्यार का गागर छलका देती है।  वही बच्चे बड़े होकर भूल जाते बचपन का प्यार दुलार संस्कार न ध्यान रखते न ही सेवा करते बुढ़ापे में छोड़ते  साथ कई बार। पल-पलContinue Reading

नारी समाज का आभूषण, नारी देश की शान, घर को देकर बहुमूल्य सेवा, बढ़ाती अपनों का सम्मान। नारी बिना पुरुष अधूरा, पुरुष बिना अधूरी नारी, दोनों सम्पूर्ण एक दूजे संग, हमसफर बन गुजारे जिंदगी सारी। नारी के मातृत्व रूप पर, ईश्वर भी बलिहारी जावे, माँ बनकर जीवन देवे, सृष्टि मेंContinue Reading