पारलौकिक प्रेम मुझसे प्रेम करना देह से ऊपर मेरे कोमल मन की है कहानी अबीर कुमकुम इंद्रधनुष सी सजी ये रंगत है जा़फरानी। हर सुबह सूरज की लालिमा चूमती मेरे गाल बिखेरती अपनी किरणें रंग देती मुझे भी पीले लाल। ये पत्ते ये शाखें और टहनियां झूम झूम कर प्रेमContinue Reading

वो अधूरी शाम, कई अनकही बातें, खामोश लम्हें,तेरा पहला दीदार, इज़हार ए ख्वाब अभी काफ़ी है, तुम्हारा इंतज़ार अभी बाकी है।  एक लम्बी सी काली कार से, उतरते दो लम्बे पाँव, गुलाबी जैकेट से खिला तुम्हारा तन, भीड़ को देख कर, मुस्कुराती तुम्हारी निगाहें, स्वच्छ भारत के लिये, आह्वान करतीContinue Reading