दर्पण देख खूब संवर गया राधा के रूप से निखर गया  आईने को खिलता देख कर कान्हा का मन यहीं ठहर गया गोरी का कर अद्भुत श्रृंगार वेणु भी अधरों पर लहर गया प्रेमी परिंदों को नहीं पता कब कैसे कौन सा पहर गया यौवन ने ली जब अंगड़ाई चाँदContinue Reading

सृष्टि के श्री हरि विष्णु तारणहार द्वापर युग कृष्ण रूप लियो अवतार जन्माष्टमी का अद्भुत अपूर्व त्यौहार आनंद उमंग उल्लास हर घर हर द्वार। देवकी माता ने जन्म दियो यशोदा माता बनी पालनहार लाड प्यार में बितायो बचपन नटखट बाल रूप मोहक अपार। कभी माखन चुरा कर दिल लुभायो कभीContinue Reading