चाँद पर हो अपना घर सपना सलोना बड़ा सुंदर श्वेत चाँदनी जन्नत सी शीतल पुरवाई पहर-पहर चाँद चमकीला उजास में मन का सितार आस में घूंट मधु का निशी मनभावन नैनों से नैनों की रास में कुछ लम्हें यहाँ कायनात के बहुरे मोती गिरे बरसात के स्निग्ध छटा जादूगरनी सीContinue Reading

ख्वाहिशें दम तोड़ रही है उम्मींद का दामन बचा नहीं है ज़िंदगी दर्द जोड़ रही है खुशियों का आलम सजा नहीं है मुझ को नहीं हो रहा है यक़ीन क्यूँ दिल में उमस-सी तारी है बेबसी से गुजर रहा है दिन अश्कों से रात अक्सर भारी है। भीड़ में भीContinue Reading