सावन का सोमवार महादेव का श्रृंगार बम बम भोलेनाथ कृपा करो बारंबार हाथ में लेकर डमरू शिव ही प्रबंधन गुरु गले में सर्पन माला नमन वंदन मैं करूँ महादेव का तांडव डर गए देव दानव जटा में है गंगा धार पूजन करते मानव शिव है त्रिशूलधारी प्रलय असुर संहारी नटराजContinue Reading

जो ख़ुद ही ज़हर पी जाते हैं  दूसरों पर अमृत छलकाते हैं  वही नीलकंठ महादेव कहलाते हैं।  आसां नहीं ज़हर ख़ुद के लिए रखना फूलों को छोड़ कर कांटों पर चलना कड़वाहट के घूंट गले से यूँ निगलना। ऐसा सिर्फ वो इंसां कर सकता है जो अपना कलेजा बड़ा रखताContinue Reading

अपने हिस्से की भूख दबाकर माँ बच्चे को रोटी खिला देती है रोटी में अमृत की बूंदे समा कर प्यार का गागर छलका देती है।  वही बच्चे बड़े होकर भूल जाते बचपन का प्यार दुलार संस्कार न ध्यान रखते न ही सेवा करते बुढ़ापे में छोड़ते  साथ कई बार। पल-पलContinue Reading

मेरे मन को ले जा रही है ये हवाएं आसमाँ की ओर अब इन हवाओं से क्या कहूँ इरादों को पंख लग गए हैं अब कौन बांध पाएगा निगाहों में टिकी है मंज़िल अर्जुन की तरह लक्ष्य साधे बस उस ओर बढ़ चला हूँ नहीं इसे कोई रोक पाएगा इनContinue Reading

चुन चुन के लाए हम सितारें हाथ लगाया अंगारा लगता है भीड़ बढ़ती बना काफ़िला क्यूँ कोई नहीं समझता है खोद कर थक गया फावड़ा पाताल भी सूखा मिलता है जल कर सूराख बना बड़ा सूरज गगन में दहकता है अंतिम रात गहन अमावस चाँद खिलने को तड़पता है थकContinue Reading

आज म्हारे घर गणगौर माता आई है पूजा करण सारी सखियाँ संग लाई है माथे पर चुन्दड़ लाल सजाई है सगला रे मन में खुशियां खूब छाई है कुमकुम टीका रोली चंदन हाथ जोड़ करें सब शुभ वंदन गीत सुरों री लहरी सजाई है चंग री थाप सू मन हर्षायीContinue Reading

बचपन से पचपन के सफ़र में सच्चा मित्र बनकर साथ दिया मेरे दिल में भरे ढेरों सवालों का पल – पल सही तूने जवाब दिया भटके मन की व्यथा को कम कर मन को एकाग्र शांति सुकून दिया कभी मुझे हँसाकर कभी रुलाकर सशक्त शिक्षा प्रेरणा सद्गुण दिया पुस्तक लेContinue Reading

ख़ुद को तराश लीजिये जिदंगी बेहतर महसूस होने लगेगी बिखरे मोती को जोड़ लीजिये खूबसूरत माला सजने लगेगी विसर्जन करो मन विकारों का नव चेतना में जाग्रति आएगी चिराग़ जला कर रख लीजिये स्याह रात धुंधली हो जाएगी। दूसरों की छोड़िए ज़नाब स्वयं को जीने का आनंद आएगा अहंकार सेContinue Reading

पुस की अंधेरी रात सर्द हवाएं यादों में लेखक मुंशी प्रेमचंद इंसान और पशु प्रेम का भाव सजाती ये कथा पहली पसंद कहानी का नायक हल्कू और जबरू कुत्ते के रात्रि का संघर्ष मार्मिक कथा काव्य में रूपांतरित कर हुआ हृदय को स्पर्श पैसों की तंगी जमीनदार की धौंस जमाContinue Reading

परिंदों को पंख मिले गली मोहल्लों को मिली पहचान सचिन ने जब बल्ला उठाया राष्ट्र का बढ़ाया सम्मान मिट्टी से सने हाथ-पैरों ने लिखा इक नया इतिहास कहानी किस्से सपने बचपन के जीवित एहसास खेल-कूद पढ़ाई-लिखाई निश्चल बाल सुलभ मन भूल-भुलैया बंद कमरा न जाने क्यूँ खोता बचपन सूरज सेContinue Reading