दर्पण देख खूब संवर गया राधा के रूप से निखर गया  आईने को खिलता देख कर कान्हा का मन यहीं ठहर गया गोरी का कर अद्भुत श्रृंगार वेणु भी अधरों पर लहर गया प्रेमी परिंदों को नहीं पता कब कैसे कौन सा पहर गया यौवन ने ली जब अंगड़ाई चाँदContinue Reading

जो ख़ुद ही ज़हर पी जाते हैं  दूसरों पर अमृत छलकाते हैं  वही नीलकंठ महादेव कहलाते हैं।  आसां नहीं ज़हर ख़ुद के लिए रखना फूलों को छोड़ कर कांटों पर चलना कड़वाहट के घूंट गले से यूँ निगलना। ऐसा सिर्फ वो इंसां कर सकता है जो अपना कलेजा बड़ा रखताContinue Reading

पन्द्रह अगस्त का दिन कहता है, आज़ादी अभी अधूरी है, इस सोच – समझ वाले शख्सियत की, महायात्रा अब तो पूरी है। तू पथिक है सत्य का, तू युग पुरुष है हिन्दुत्व का, नव – जीवन का आह्वान लिए, प्रभु के निमंत्रण को स्वीकार किए, साँसे जिनकी थम गई, घड़ीContinue Reading