जो ख़ुद ही ज़हर पी जाते हैं  दूसरों पर अमृत छलकाते हैं  वही नीलकंठ महादेव कहलाते हैं।  आसां नहीं ज़हर ख़ुद के लिए रखना फूलों को छोड़ कर कांटों पर चलना कड़वाहट के घूंट गले से यूँ निगलना। ऐसा सिर्फ वो इंसां कर सकता है जो अपना कलेजा बड़ा रखताContinue Reading

कोरोना वायरस ने हमारी संस्कृति को किया पुनर्जीवित… सदियों से प्राकृतिक आपदा ने अपना तांडव खेल दिखाया है,कभी महामारी से तो कभी सुनामी से,कभी अग्नि ताप से तो कभी भू-स्खलन से, ऐसा क्यों होता है? जब प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ करते हैं तो परिणाम अवश्य ही हमें भुगतने पड़ते है।Continue Reading

16 संस्कारों की श्रृखंला में पाँचवा हिन्दू संस्कार है नामकरण संस्कार, जिसमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संतान का नाम रखा जाता है।नाम का प्रभाव स्थूल सूक्ष्म व्यक्तित्व पर गहराई से पड़ता है। नाम को सोच समझकर सूझबूझ से रखा जाना चाहिए, क्योंकि नाम की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण है।मात्र राम नामContinue Reading