पलक  झपकते  ही क्या कुछ नहीं बदल गया  एक तेरे चले जाने से हर चेहरा ही बदल गया  ग़म  उठा ले आया  कहाँ से  हवा  का  झोंका  धरती तो  बदली ही आसमाँ भी बदल गया।

  भीड़ में वो चिल्लाते रहे मन ही मन हम मुस्कराते रहे क्या औक़ात है उसकी बिना कहे ही उसे समझाते रहे