चाँद पर हो अपना घर सपना सलोना बड़ा सुंदर श्वेत चाँदनी जन्नत सी शीतल पुरवाई पहर-पहर चाँद चमकीला उजास में मन का सितार आस में घूंट मधु का निशी मनभावन नैनों से नैनों की रास में कुछ लम्हें यहाँ कायनात के बहुरे मोती गिरे बरसात के स्निग्ध छटा जादूगरनी सीContinue Reading

बरसों से बैठा ये देख रहा मैं राहगीरों को बस आते-जाते अटल साक्षी हूँ इस पथ का बीते दिन यहाँ बीती हर रातें मौसम की कभी ढलती छाया धूल मिट्टी में सदा लिपटा रहा कल भी था वही मैं आज भी अपनी जगह पर सिमटा रहा मंज़िल का हूँ संकेतContinue Reading