मैं थकी मांदी लौटी अपने घर बाहें पसारे बेटी खड़ी द्वार पर दौड़ कर गई रसोई घर लेकर आई एक गिलास पानी पिलाया और कहा तुम थकी हो मेरी माँ थोड़ी देर बैठो मेरे पास बताओ तुम्हारे दफ़्तर में क्या हुआ आज ख़ास कुछ देर गुफ़्तगू हुई मन हो गयाContinue Reading

शीर्षक – दो पल गुफ़्तगू के एक चिड़ियां आज मुंडेर पर आई हँसने लगी मुझ पर और बड़ी चहचहाई माना कि तुम पर बड़ी आपदा आई कहने लगी तुम डरती क्यों हो भाई फिर उसने पंख फ़ैला कर एक कविता मुझको सुनाई…. हर रोज़ सुबह सबको जगाती हूँ इस आँगनContinue Reading