कोरोना ने एक दिन मुझे इतना डरा दिया कि रात सोते हुए को मुझे जगा दिया क्या मृत्यु इतनी नजदीक खड़ी है जैसे बाजूवाली की खिड़की खुली है। डर से क्या ऊपर निकल पाऊँगी सामान्य जीवन क्या वापस जी पाऊँगी डर कि लहर दौड़ने लगी थी मन में मृत्यु केContinue Reading

कतई ऐसा न करें विवाह का खुबसूरत समारोह, दो दिलों का एकाकीकरण, दो परिवारों का मिलन, पिता के जीवन भर की जमा पूंजी से सजाई गई खुशियों की महफिल किसके लिए? अपने रिश्तेदार, मित्र और अपने पहचान वालों के लिए, जिसमें सभी लोग शामिल होकर आनंद से झूमे, नाचे,गाये, खायेContinue Reading