अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

कौन से जीवन का कसूर भाग्य क्यूँ हुआ मजबूर संसार चक्र है नासूर बाल मजदूर कभी बेचता गुब्बारे कभी बेचता पतंग बेहाल फटेहाल जिन्दगी है ख़ुद से ही तंग छोटू दो कप चाय लाना रिश्ता इन शब्दों से बड़ा पुराना नन्हें हाथों से जूठे बर्तन धीरे-धीरे होता परिवर्तन गरीबी शोषणContinue Reading