शास्त्र कहता है कि… काम क्रोध मद लोभ। सब नाथ नर्क के पंथ।। पर क्रोध जरूरी है क्यों? क्रोध विषाक्त ज़हर निकालना जरूरी है चित्त असीम शांति के लिए क्रोध जरूरी है संतान को सही राह दिखाने क्रोध जरूरी है अनुशासन वास्ते शिक्षक का क्रोध जरूरी है समस्या समाधान केContinue Reading

ख़्वाहिशों की तपिश चाँद की चाँदनी अधूरी क्यूँ है तड़प उठती मेरे सीने में दिलों की प्यास अधूरी क्यूँ है बुलबुले उठ रहे है स्वप्न जाल ये रात अधूरी क्यूँ है लबों पे ख़ामोशी घायल मन की बात अधूरी क्यूँ है चूड़ियों की खनक पायल की झंकार अधूरी क्यूँ हैContinue Reading

एक छोटी सी कहानी – संगठन छह पौधे लगाए गये।माली सब को बराबरी से उन पौधों को सीच रहा था और देखते ही देखते सारे एक साथ बढ़ते गए। एक दिन बहुत तेज आँधी चली, पर कोई भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, क्योंकि सब बराबर लंबाई और मजबूती के साथ खड़ेContinue Reading

A for Apple पर इससे भी कुछ ऊपर…. #Affiliation #Attention #Appreciation #Acknowledge 1.Affiliation – लोगों से जुड़ना यानि टीम वर्क – नव ग्रह से सौर मंडल, सूरज, चाँद, सितारे जिनसे बनता है पेड़ पौधों का भोजन और जीवन, उनसे हमें मिलता है आक्सीज़न, यहीं से साँसों का लेन देन, कोईContinue Reading

हद से गुजरने की है ख़्वाहिश  मुझे माफ़ कर देना तेरे दिल में उतरने की फरमाइश़ मुझे माफ़ कर देना  आज रात तेरे दीदार के ख़ातिर पल भर जो अगर ठहर जाऊँ तो मुझे माफ़ कर देना

कल आज से बेहतर कैसे हो? कल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा, समझ, संस्कार, संकल्प, संगठन, संगति, संघर्ष, संचय, संतुलन, संतुष्टि, संयम, संवेदना, संयुक्त, संशोधन, सकारात्मक सोच, सच्चरित्र,सचेष्टा, सज्जनता, सत्कर्म, सत्यता, सदापर्णी, समदर्शिता, समयनिष्ठा,समर्पण, सरलता, सरसता, सृजनात्मक, सहनशीलता, सहयोगिता,सहृदयता, साझेदारी, सात्विक, साचित्य, सादगी, सामाजिकता, सामंजस्यपूर्ण, साहसी, सार्थक, सारगर्भित, सिद्धांत,Continue Reading

अनेकता में एकता का प्रादुर्भाव हुआ हर नागरिक के दिल में जन्म सद्भाव हुआ। न्यायधीशों को करते हैं हम सब नमन गद्-गद् उठा है हर भारतवासी का मन।  हिन्दुत्व की इधर शान बढ़ी मुस्लिम का उधर सम्मान बढ़ा। सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा फैसला होगा अब अयोध्या में राम ललाContinue Reading

माँ और शिक्षिका दोनों एक समान है….माँ जीवन देती है, शिक्षिका जीना सिखाती है माँ आत्म-विश्वास जगाती है, शिक्षिका अनुशासन सिखाती है।माँ रोज सुबह जल्दी उठकर टिफ़िन बनाती है, स्कूल भेजती है,शिक्षिका रोज सुबह जल्दी उठ कर स्कूल पहुँचती है आपको पढ़ाती है, एक्टिविटीज करवाती है।माँ जब आप बीमार होतेContinue Reading

बचपन से हमने पढ़ा और सुना है कि गाय हमारी माता है, पर क्या हम सचमुच में मानते हैं? कई समय से ईश्वरीय कृपा से गौ सेवा का सुअवसर मिला है तो मानो यूँ लगता है कि इससे पहले जीवन व्यर्थ ही व्यतीत हुआ है। किसी विशेष परिणाम के लिए निरंतरताContinue Reading