कवि की काव्य कृति छंद लय बद्ध रीति  साहित्य की अविरल रस गंगा अद्भुत मीठी  मनोभावों की मोहिनी कलात्मक अभिव्यक्ति  हृदय तलब सुखद सुमधुर प्राचीन संस्कृति। कभी काव्य में कोमल सरस भाव बताता  कभी व्यंग्य से तीखे शब्द भरे बाण चलाता ओजस्वी काव्य से राष्ट्र नव चेतना जगाता  श्रृंगार हास्यContinue Reading

हमसफ़र ना सही हमदर्द बना लो पाँव के छालों पर मरहम लगा दो माना राह पर साथ न चल पाओगे सुख दुख बाँट कर जीना सीखा दो। किस्मत ने खेला बड़ा अज़ीब खेल मुकम्मल नहीं हुआ हमारा सफ़र तन्हाई से लिपट गया पूरा आसमाँ उदासी से भर गई हमारी प्रेमContinue Reading

भारत की राजभाषा हिंदी। हम सबकी मातृभाषा हिंदी। हिन्दुस्तान की पवित्र डोर हिंदी। आत्मा की सुदृढ़ जोड़ हिंदी। उन्नत शीश की बिंदी हिंदी। प्रगति का प्रतिबिंब हिंदी। संस्कृति की पहचान हिंदी। संस्कारों का सम्मान हिंदी। स्नेह प्रेम प्रीत सद्भाव हिंदी। प्रधानमंत्री मन की बात हिंदी। बोलचाल की भाषा हिंदी। हरContinue Reading

ज्ञान मुद्रा में बैठ कर आँखे मूँद कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। परमात्मा की सेवा कर दैवीय भक्ति कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। स्वयँ से प्रेम कर खुद को समर्पित कर महसूस किया जीवन बहुत अद्भुत है। संघर्षों से टकरा कर उसको हरा कर महसूस कियाContinue Reading

सावन भादों का है ये मास रिमझिम बरस रहा आकाश। मुहँ में आया निराला स्वाद प्याज के पकौड़े की हुई बात। चूल्हे पर चढ़ाई तेल की कढाई खाएंगे पकौड़े पीछे पड़े जवाई। सुहाना मौसम गरम चाय बनाई प्लेट में पकौड़े पुरस कर आई। आप जानते हो क्या हुआ भाई! पकौड़ेContinue Reading

रोटी और बेलन जैसे दिया बाती जैसे पति पत्नी संगी और साथी। रोटी और पृथ्वी दोनों ही गोलाकार एक पेट की आहार दूजी सौर की आधार। रोटी और सब्ज़ी रोटी भरती पेट सब्ज़ी देती स्वाद अच्छा मेल मिलाप। रोटी कपड़ा मकान मूलभूत सारे समान दो जून मिले रोटी ग़रीब काContinue Reading

संयुक्त जिनका परिवार खुशियाँ होती अपार थोड़ी सी होती तकरार बहुत ज्यादा सबमें प्यार अविभाजित संसार सुरक्षित घर संसार दादा दादी मीठी फटकार जीवन सुलझता कई बार चाचा चाची जिम्मेदार साथ निभाते बार बार एक रसोई घर के होते अनेकों सदस्य भागीदार परिवार व रिश्ते एक फायदे सबके अनेक त्यौहारोंContinue Reading

हमारे भगवन् श्री गणेश प्रथम सुमिरन विशेष करते इनकी आराधना मन में बढ़ती सद्भावना विद्या बुद्धि बल दायक विघ्न नाशक मंगलकारक रिद्धि-सिद्धि शुभ कारज पूर्ण होते सकल मनोरथ खीर पूरी अनेकों पकवान भोग लगते मोदक मिष्ठान मूषक की इनकी सवारी दिखती बड़ी प्यारी न्यारी माता पिता की परिक्रमा जो करेContinue Reading

कर्म ही धर्म है कर्म ही पूजा है कर्म ही खुशी है कर्म ही आनंद है कर्म ही धर्म है कर्म ही पूजा है इसके बिना नहीं कुछ और दूजा है… कर्म ही धर्म है कर्म ही पूजा है… अपने बाजुओं में कर भरोसा कर्तव्य पथ पर अग्रसर हो कर्मContinue Reading

देश की सरहद पर खड़े  सेनानी कहलाते शूरवीर देश को स्वच्छ कर अपना दायित्व निभाते कर्मवीर शूरवीर बांध सर पर कफ़न देश की रक्षा में मर मिटता है कर्मवीर दिन रात जुट कर देश की सेवा में जगता है मातृभूमि की आज़ादी में दिया जिन्होंने बलिदान हमें बढ़ाना है उनContinue Reading