ऐ ख़ाकी वर्दी वाले तुझ पर ये दिल निस्सार हो गया माना हमारी सुरक्षा के लिए दूर तेरा प्यारा संसार हो गया तेरी त्याग और कर्मठता पर नमन हमें बारंबार हो गया हमारा सफ़र-ए-जिंदगी तेरे पहरेदारी से शानदार हो गया। कोरोना की इस जंग में हम आपके आभारी हैं।

कैसी ये त्रासदी, कैसा ये शहर भटक रहा मज़दूर हो रहा दर बदर घर बनाने वाला ख़ुद ही हुआ बेघर    न वर्तमान न ही भविष्य की रखता ख़बर। 

धरती अम्बर चाँद सितारे लगते हैं कितने प्यारे  जीवन के बंधन न्यारे   प्रीतम छूटते टूटते तारे   शोक नहीं मनाते सारे जो बीत गई वो रात है चाँद के बाद फिर से सूरज का आगाज़ है। Attachments area