पड़ोसी ने मांगी दालचीनी मैंने कहा रोज रोज मांगते हो मुझसे आज नहीं दीनी। वो बोला क्यों होते हो नाराज हर सुख दुख का मैं ही साथी हूँ तेरा हमराज़। परिवार तेरा रहता दूर मैं ही हूँ तेरे जीवन का नूर कहने को मेरे भाई मत कर मुझको मज़बूर। आधीContinue Reading

हाथों में लगती मेहंदी बालों में सजता गज़रा माथे पर सोहती बिंदी खन खन करता कंगना। उफ्फ ये सोलह श्रृंगार औरत की खुबसूरती अपार दिल में होता खूब प्यार हरियाली तीज़ का त्यौहार। तीज़ के पूर्व होता सिंजा़रा यह दिन होता बड़ा प्यारा रिश्तों में घुलती मिठास महकता घर आँगणContinue Reading

तीव्र हवाऐं चीरती कानों को छीन लिया ज़िन्दगी का सुकून वृक्ष हिलता पत्ता पत्ता डर रहा तेज़ रफ़्तार से गिरता पड़ता सभंल रहा न जाने क्यूँ दौड़ रहे हैं सब ठहराव नहीं किसी में अब ख़्वाबों के मुकम्मल की आरज़ू में रुकेगा ये काफ़िला कब!

प्रशंसा के मीठे बोल होते बड़े अनमोल। प्रशंसा मानव की अभिलाषा सुन्दर जीवन की परिभाषा। दूर होती निराशा मन में जगती आशा। सच्ची प्रशंसा हृदय लुभाती हर मन का उत्साह जगाती। प्रशंसा सफलता का सोपान बच्चों का होता उत्तम निर्माण। खेल कूद हो या पढ़ाई प्रशंसा से बढ़ती अच्छाई। प्रफुल्लितContinue Reading

बदरा मोरी अटरिया में मचावे शोर रिमझिम बरसे मेघ नाचे मन मोर। पपीहा बोलन लागा मेढक देवे ताल उछल उछल फुदक कर मचावे धमाल। सूखी धरती लहलहा कर झूमन लागी चमक चमक बिजुरिया ग़रजन लागी। अमराई में झूलो भर आयो है मुखड़े पे बड़ो ही खुशियाँ लायो है। बलखाती छोरीContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

खामोश गहरी आँखे, टूटता इंसान दिल में अथाह पीड़ा, बिखरती दर्द की पहचान। होठों पर लरज़ता रुदन, बेबस जिंदगी प्रेम की आस में, हृदय में घूटती सिसकी। फिर भी कांपते हाथों से देते हैं हमें आशीर्वाद बुजुर्गों के स्पर्श से खुलते उन्नति के मार्ग। ये हमें जानना होगा, मानना होगाContinue Reading

कोरोना ने एक दिन मुझे इतना डरा दिया कि रात सोते हुए को मुझे जगा दिया क्या मृत्यु इतनी नजदीक खड़ी है जैसे बाजूवाली की खिड़की खुली है। डर से क्या ऊपर निकल पाऊँगी सामान्य जीवन क्या वापस जी पाऊँगी डर कि लहर दौड़ने लगी थी मन में मृत्यु केContinue Reading

गिर कर थपेड़े वक़्त के खाती रही हूँ मैं फिर से चलने का साहस बढ़ाती रही हूँ मैं मंज़िल की ओर निरंतर जाती रही हूँ मैं हर पल हर दिन नई ऊर्जा लाती रही हूँ मैं। आत्मबल से पूरित हो जाए मेरा पूरा जीवन उत्साह उमंग आनंदित उल्लासपूर्ण हो मेराContinue Reading

दुख से ऊपर उठकर जीना मानव जीवन की पहचान है माना चिर सुख की चाहत हर दिल का अरमान है। पल पल समय बदलता अंधेरे के बाद ही तो उजाले का विधान है। दुख से ऊपर उठकर जीना मानव जीवन की पहचान है।  रात न आती तो क्या हम देखContinue Reading