बदरा मोरी अटरिया में मचावे शोर रिमझिम बरसे मेघ नाचे मन मोर। पपीहा बोलन लागा मेढक देवे ताल उछल उछल फुदक कर मचावे धमाल। सूखी धरती लहलहा कर झूमन लागी चमक चमक बिजुरिया ग़रजन लागी। अमराई में झूलो भर आयो है मुखड़े पे बड़ो ही खुशियाँ लायो है। बलखाती छोरीContinue Reading

कोरोना ने सिखाया शिष्टाचार एक दूजे को करते नमस्कार बड़ो का सम्मान छोटों से प्यार हमारी सभ्यता,संस्कृति और संस्कार। अमूल्य आभूषण व्यक्तित्व का श्रृंगार जब होता जीवन में शिष्टाचार उत्तम समाज का सुदृढ़ आधार सहयोग विनम्रता ममता उच्च विचार। निश्चल प्रेम सद्भावना सद्व्यवहार प्रथम सीख देता परिवार गुरु ज्ञान सेContinue Reading

अमीरी का दंभ भरने वाले कहाँ है वो अमीर चंद पैसों के लिए जो बेच देते अपने ज़मीर आजमा कर देखो इन्हें बन जाएंगे वो फ़कीर। ग़रीब तब तक ही ग़रीब है जब तक कोसता अपना नसीब है मुफ़्त के राशन से होता लाचार ये मंजर कितना अज़ीब है आगContinue Reading

जुनून कुछ कर दिखाने का अपने साहस से कुछ पाने का। दीवानगी इस कदर छाई है अपार ऊर्जा भर आई है। सपनों को नए पंख लगे हैं उड़ान भरने को मचल उठे हैं। जुनून ए इश्क़ हो या कुछ बनने की चाह आत्मविश्वास से मिलती राह। नींद नहीं मुझे आContinue Reading

मैं भारत माता साक्षात् तुम्हारे समक्ष हूँ हृदय शूल वेदना से, आकुल व्यथित प्रत्यक्ष हूँ। मेरे वीर बेटों को चीनी ने मार दिया मेरी छाती पर दी गहरी चोट और वार किया मेरे अंगों के टुकड़े देख कर क्या तुममें अब भी अगन नहीं ज्वलित होती अब और धीर नहींContinue Reading

तर्क और वितर्क करते-करते कब कुतर्क से ग्रसित हुए गंवा दिए अपना अमूल्य जीवन नहीं हम विकसित हुए हठ असंयम अनर्गल बातों से ख़ुद की ऊर्जा को नष्ट किया माना बनाया स्वयँ को विजेता अहंकार मूर्खता से पथ भ्रष्ट किया। कुतर्क को क्यों देते हैं हम तर्क भ्रम के बीमारोंContinue Reading

कभी जहर खाकर तो कभी फंदा लगाकर कभी ऊंचाई से गिरकर तो कभी खुद को जलाकर क्यों करते हो आत्महत्या! मरने का इतना साहस है तुममें तो जिंदा रहने की कोशिश कर जाते नई ताक़त नई शक्ति लगाकर जीने की मिशाल बन दिखाते। कमज़ोर तन के मजबूत इरादे देख जीवनContinue Reading

कौन से जीवन का कसूर भाग्य क्यूँ हुआ मजबूर संसार चक्र है नासूर बाल मजदूर कभी बेचता गुब्बारे कभी बेचता पतंग बेहाल फटेहाल जिन्दगी है ख़ुद से ही तंग छोटू दो कप चाय लाना रिश्ता इन शब्दों से बड़ा पुराना नन्हें हाथों से जूठे बर्तन धीरे-धीरे होता परिवर्तन गरीबी शोषणContinue Reading

पारलौकिक प्रेम मुझसे प्रेम करना देह से ऊपर मेरे कोमल मन की है कहानी अबीर कुमकुम इंद्रधनुष सी सजी ये रंगत है जा़फरानी। हर सुबह सूरज की लालिमा चूमती मेरे गाल बिखेरती अपनी किरणें रंग देती मुझे भी पीले लाल। ये पत्ते ये शाखें और टहनियां झूम झूम कर प्रेमContinue Reading

खामोश गहरी आँखे, टूटता इंसान दिल में अथाह पीड़ा, बिखरती दर्द की पहचान। होठों पर लरज़ता रुदन, बेबस जिंदगी प्रेम की आस में, हृदय में घूटती सिसकी। फिर भी कांपते हाथों से देते हैं हमें आशीर्वाद बुजुर्गों के स्पर्श से खुलते उन्नति के मार्ग। ये हमें जानना होगा, मानना होगाContinue Reading