मेरे मन को ले जा रही है ये हवाएं आसमाँ की ओर अब इन हवाओं से क्या कहूँ इरादों को पंख लग गए हैं अब कौन बांध पाएगा निगाहों में टिकी है मंज़िल अर्जुन की तरह लक्ष्य साधे बस उस ओर बढ़ चला हूँ नहीं इसे कोई रोक पाएगा इनContinue Reading

बस तुम ही तो हो मेरे जीवन के आधार पल पल गति साँसों की प्राणों के सार मेरे सुख दुख के साथी जन्मों का बंधन ऊर्जा नव संचार प्रियतम का आलिंगन बस तुम ही से बना मेरा प्यारा परिवार अनन्त आकाश धरती मिलन  संसार तुमसे मिला प्रेम  अद्भुत दैवीय मिलनContinue Reading

धरती अम्बर चाँद सितारे लगते हैं कितने प्यारे  जीवन के बंधन न्यारे   प्रीतम छूटते टूटते तारे   शोक नहीं मनाते सारे जो बीत गई वो रात है चाँद के बाद फिर से सूरज का आगाज़ है। Attachments area