शीर्षक – दो पल गुफ़्तगू के एक चिड़ियां आज मुंडेर पर आई हँसने लगी मुझ पर और बड़ी चहचहाई माना कि तुम पर बड़ी आपदा आई कहने लगी तुम डरती क्यों हो भाई फिर उसने पंख फ़ैला कर एक कविता मुझको सुनाई…. हर रोज़ सुबह सबको जगाती हूँ इस आँगनContinue Reading

माँ का रुदन, धरती माँ का क्रंदन, परमात्मा का स्पन्दन उन संतानों के लिए जिसे उसने जन्म दिया क्योंकि जब सृष्टि किसी की उत्पत्ति करती है तो वह अपना सर्वस्व बलिदान कर उसे स्वरूप प्रदान करती है। मनुष्य को प्रेम करने से ज्यादा सरल मानवता को प्रेम करना है क्योंकिContinue Reading

आशा है विश्वास है हाँ नादानियों का अवसाद है। बद्ध पिंजर में व्याकुल दुःख का क्यों एहसास है!  बनाया मार्ग इससे बचने का मान लेना मन से यही ख़ास है। कोरोना के भय से मुक्ति धरती पुत्रों का प्रयास है। नया सूरज निकलेगा फैलेगा प्रकाश है। बूँद बूँद के अमृतContinue Reading

संगीत साज़ और अंदाज़ सुर और ताल का आगाज़ दूर करे मन के विकारों को मिलाओ मेरी आवाज़ में आवाज़। मधुर संगीत वैश्विक भाषा हम सब में शक्ति बढ़ाता शांति के पथ पर ले जाता इसका श्रवण कर अथाह ऊर्जा पाता। सूरज के अग्न ताप में कोरोना से लड़ने कीContinue Reading

ताश शतरंज कैरम सिक्वेंस लूडो उनो ऑनलाइन हाउजी आप सब क्या खेल रहे हो                 हमें भी तो बता दो जी…   समझदारी ख़त्म, कोरोना की बातेँ छोड़ो, घर बैठकर आओ खेले खेल ऐसा खेल खेले हम जिसमें जीत हो चाहे हार हो मित्रों और रिश्तेदारों के साथ  आनंद जिसकाContinue Reading

पुराने एल्बमो की धूल  झाड़ने का समय आ गया है। बीती यादों के साथ अपनों से जुड़ने का समय आ गया है।