अपने हिस्से की भूख दबाकर माँ बच्चे को रोटी खिला देती है रोटी में अमृत की बूंदे समा कर प्यार का गागर छलका देती है।  वही बच्चे बड़े होकर भूल जाते बचपन का प्यार दुलार संस्कार न ध्यान रखते न ही सेवा करते बुढ़ापे में छोड़ते  साथ कई बार। पल-पलContinue Reading

टेसु से सजा महकता बाबुल का आँगन फागुनी हवा में खुशबु चहुँ ओर छाई है सितार वाद्य संग हो रहा शहनाई वादन साजन से प्रेम मिलन रुत देखो आई है माँ की आँखे नम चेहरे पर खुशी लेकर कलेजे के टुकड़े को दे रही वो विदाई है लाड प्यार सेContinue Reading