हर गली हर चबूतरा चौपड़ चौराहा पगडंडी                                राजा जी के किले पहाड़ी महलों के द्वार से प्राचीन संस्कृति पुरखों का गुरूर प्रेम की थपकी                                जीवन के रंग-ए-नूर आदर सत्कार से  फीणी घेवर मिर्ची बड़े समोसे प्याज़ की कचौड़ियां                                  स्वाद की खुशबू महकती हवाओं में मोहब्बत सा हसीनContinue Reading

अमावस्या की रात में  हर देहरी दीप जगमगाता  रोशनाई से धरती का  सुन्दर स्वरुप  निखर जाता भारतीय संस्कृति का  दीपावली अद्भुत त्यौहार हर आँगन चमकता  दीप मिटाता अंधकार  जगमगाती सारी धरती  खिलखिलाता संपूर्ण संसार निराशा के तिमिर छँटते आशा का होता संचार  धन धान्य की होती वृष्टि  मिलता सबको रोज़गार Continue Reading