हर आँख ग़मगीन है,  हर होंठ पर धुनी रमायी है,  हर गली हो रही वीरान,  सुषमा जी की हुई विदाई है।  जन्म-मरण काल चक्र के दो चरण,  निरंतर चलता जाएगा,  आज तेरी बारी कल मेरी बारी,  जो आया है सो जाएगा।  फूल बन कर जो जिया, वो मसला जाएगा, Continue Reading

पन्द्रह अगस्त का दिन कहता है, आज़ादी अभी अधूरी है, इस सोच – समझ वाले शख्सियत की, महायात्रा अब तो पूरी है। तू पथिक है सत्य का, तू युग पुरुष है हिन्दुत्व का, नव – जीवन का आह्वान लिए, प्रभु के निमंत्रण को स्वीकार किए, साँसे जिनकी थम गई, घड़ीContinue Reading