सावन में भीगे हम भी सावन में भीगे तुम भी आग लगी सीना दहका आँचल भीगा सा मन का। मोहक बौछारें बरसे मादक हो त्यौं-त्यौं हरषे पायल के गूँजें घुँघरा प्रीतम को छू के बिखरा। पागल बूंदे नाच रही कोमल गंगा धार बही अंचल से गीला झरना चुंबन से अंकोंContinue Reading

बदरा मोरी अटरिया में मचावे शोर रिमझिम बरसे मेघ नाचे मन मोर। पपीहा बोलन लागा मेढक देवे ताल उछल उछल फुदक कर मचावे धमाल। सूखी धरती लहलहा कर झूमन लागी चमक चमक बिजुरिया ग़रजन लागी। अमराई में झूलो भर आयो है मुखड़े पे बड़ो ही खुशियाँ लायो है। बलखाती छोरीContinue Reading