ख़ुद को तराश लीजिये जिदंगी बेहतर महसूस होने लगेगी बिखरे मोती को जोड़ लीजिये खूबसूरत माला सजने लगेगी विसर्जन करो मन विकारों का नव चेतना में जाग्रति आएगी चिराग़ जला कर रख लीजिये स्याह रात धुंधली हो जाएगी। दूसरों की छोड़िए ज़नाब स्वयं को जीने का आनंद आएगा अहंकार सेContinue Reading

फ़ितरत थी साँप की चंदन से लिपटते रहे  तन की गर्मी को ठंडक देते रहे। महफ़िल में ओढ़ मुखौटा नफ़रत करते रहे दोस्ती का नाम देकर दुश्मनी करते रहे। रिश्तों की दुकान पर ख़ुद ही बिकते रहे जब-जब करीब गए फन से डसते गए। इंसानों की बस्ती में जानवरों सेContinue Reading

परिवहन विशेषांक – 2 सीट बेल्ट की क्यों है जरूरत? कार में लगा सीट बेल्ट क्या हमारा सुरक्षा कवच है? ट्रेफिक नियमों को पालन करना क्या हमारी मजबूरी है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हम ढूँढ़ते हैं। दीपावली पर एक गृहणी के नाते अपने घर के कई घरेलू कार्योंContinue Reading