16 संस्कारों की श्रृखंला में पाँचवा हिन्दू संस्कार है नामकरण संस्कार, जिसमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संतान का नाम रखा जाता है।नाम का प्रभाव स्थूल सूक्ष्म व्यक्तित्व पर गहराई से पड़ता है। नाम को सोच समझकर सूझबूझ से रखा जाना चाहिए, क्योंकि नाम की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण है।मात्र राम नामContinue Reading

जातकर्म संस्कार जातकर्म संस्कार चौथा संस्कार, जो संतान के जन्म के तुरंत उपरांत का संस्कार है। दैवीय कृपा से बच्चा हमारे सामने प्रत्यक्ष होता है,यह सत्य है कि माँ बिना इस धरती पर आना सम्भव नहीं है, इसलिये माँ साक्षात् देवी है।जातकर्म संस्कार में हमारे घर के प्रभावशाली बुज़ुर्गो जैसेContinue Reading

सीमन्तोन्न्यन संस्कार तीसरा हिन्दू धर्म का संस्कार है, जिसका मूल उद्देश्य गर्भ में पलने वाली संतान एवं माता की रक्षा करना, मानसिक बल प्रदान करना, सकारात्मक विचारों का प्रतिरोपण करना और प्रसन्नता का चित्त में समावेश किया जाना है। चौथा, छ्ठा या आठवां पूजन हर जाति में प्रचलित है, यह गर्भपात कोContinue Reading

पुंसवन संस्कार गर्भधारण के पश्चात्‌ तीन महीने में भ्रूण का विकास होना शुरू होता है, यह समय चुनौती से भरा होता है, कई माताओं के बच्चे ठहर नहीं पाते हैं और इसका शिकार अधिकतर होते है, इसलिए शुरू के तीन महीने में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। पुंसवन संस्कार काContinue Reading