हद से गुजरने की है ख़्वाहिश  मुझे माफ़ कर देना तेरे दिल में उतरने की फरमाइश़ मुझे माफ़ कर देना  आज रात तेरे दीदार के ख़ातिर पल भर जो अगर ठहर जाऊँ तो मुझे माफ़ कर देना

धरती अम्बर चाँद सितारे लगते हैं कितने प्यारे  जीवन के बंधन न्यारे   प्रीतम छूटते टूटते तारे   शोक नहीं मनाते सारे जो बीत गई वो रात है चाँद के बाद फिर से सूरज का आगाज़ है। Attachments area