पुरुषत्व ही शिव स्वरुप शिव ही सृष्टि आधार है।  बाह्य सख्त रूखा कठोर भीतर कोमल संसार है।  सावन में करते हम पूजा शिव महिमा अपरम्पार है। शक्ति से मिलती प्रेरणा भुजा बलशाली अपार है।  तेजस्वी तेज सा व्यक्तित्व उष्म प्रकाश का भंडार है।  अर्द्धनारीश्वर का सम्मान ब्रह्मा का सृजन साकारContinue Reading

प्रेम में क्या हार हो क्या जीत ये परमात्मा का सुमधुर गीत अंतरात्मा को महसूस करना यहीं जगत की है सच्ची रीत जीत से ख़ुशी हो हार से विकल समभाव से जीवन होता सफ़ल हार जीत भुलकर ऊपर उठना कीचड़ में खिल जाता है कमल बस पा लेना ही जीतContinue Reading